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Buddha Aur Unke Dhrama Ka Bhavishya

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बुद्ध चाहते थे कि उनका धर्म अतीत की पुरानी बातों से बोझिल नहीं होना चाहिए। वह चाहते थे कि उनका धर्म हर समय सदाबहार और उपयोगी बना रहे। इसीलिए उन्होंने अपने अनुयायियों को ज़रूरत के हिसाब से कांटा-छाँट करने की आज़ादी दे रखी हैं।
किसी भी अन्य संस्थापक ने ऐसा साहस नहीं दिखाया। वे ऐसी सुधार की अनुमति देने से डरते थे। क्योंकि धर्म शिक्षा में सुधार कि स्वतंत्रता देने से कई वे उनके द्वारा खड़ी की गई संरचना (ढ़ांचे) को गिराने के लिए न करे। बुद्ध को ऐसा कोई डर नहीं था। उन्हें अपनी शिक्षा कि नींव पर पूरा भरोसा था। वे भालीभाँति जानते थे कि सबसे भयंकर मूर्तिभंजक भी उनके धर्म के मूल को नष्ट नहीं कर पाएगा।

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Description

Product details
ISBN : ‏ 9788199006607
Publisher ‏ : ‎ ASHTVINAY PRAKASHAN; 1st edition (01 Jan 2026)
Language ‏ : ‎ Hindi
Hardcover Pages ‏ : ‎ 64
Item Weight ‏ : ‎ 70 g
Dimensions ‏ : ‎ 22 x 14 x 0.5 cm
Country of Origin ‏ : ‎ India
Importer ‏ : ‎ ASHTVINAY PRAKASHAN
Packer ‏ : ‎ ASHTVINAY PRAKASHAN
Generic Name ‏ : ‎ Book
Author : Dr. Babasaheb Ambedkar
ASHT10

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